अतिक्रमण तो हट नहीं पायेगा प्रदीप बत्रा के शहर में रास्तों पर चलने की जगह रहे या नहीं रहे

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एम हसीन

रुड़की नगर की हक़ीक़त ख़राब सड़कें और टूटी-फूटी सड़कों पर वाहनों की बेतहाशा भीड़ ही नहीं, स्थाई-अस्थाई अतिक्रमण भी है। अहम बात यह है कि यह हकीकत भी जितनी कड़वी राजमार्गों पर, बाज़ारों में है उतनी ही कड़वी गली-मोहल्लों में है। इसके लिए प्रदीप बत्रा व्यक्तिगत रूप से भी ज़िम्मेदार हैं लेकिन इसके गुनाहगार वे अकेले ही हों ऐसा नहीं है। मौक़ा लगते ही बत्रा के विरोधियों, पूर्व विधायक सुरेश जैन, यहाँ तक कि ओम प्रकाश सेठी तक ने इसमें अपनी भूमिका अदा की है। नतीजा यह है कि रास्ता कहीं मिलता ही नहीं चलने के लिए।

इसी स्थान पर पहले भी बताया जा चुका है कि 19वीं शताब्दी में अंग्रेजों ने रुड़की को प्लान करके बसाया था। नगर के भूगोल को पुराना जानने के लिए डा. राकेश त्यागी से संपर्क किया जा सकता है जो बताएंगे कि मेन बाजार, चौक बाजार, रामपुर रोड और सिविल लाइन में सड़कों की चौड़ाई कितनी है।

सच बात यह है कि नगर के हर बाजार की सड़कों पर बस और ट्रक चला करते थे। फिर नगर पालिका के अध्यक्ष वयापारी बनना शुरू हुए और दुकानों ने रास्तों को खाना शुरू कर दिया। आज बाज़ारों के रास्ते पगडण्डी का रूप अख्तियार कर चुके हैं। दुकानदारों की दुकानों को आगे बढ़ाने की भूख ख़त्म ही नहीं हो रही है। इन्हीं दुकानदारों ने अपनी कालोनियों में जब इसी प्रैक्टिस को आज़माया तो गली-मोहल्ले भी अतिक्रमण की चपेट में आ गए। विधायकों-नगर पालिका अध्यक्ष भी अव्वल तो खुद ही अतिक्रमण के दोषी रहे हैं। रही-सही कसर उनकी वोटों की भूख पूरी करती रही है। फिर आपसी खाज का भी मसला है और संरक्षण का भी। यहाँ का जॉइंट मजिस्ट्रेट रहते हुए नितिन भदौरिया ने अतिक्रमण पर कार्यवाही की थी। नतीजा उनका तत्काल स्थानांतरण हो गया था। मंगेश घिल्डियाल ने रामनगर कॉलोनी में, इमली रोड पर और रामपुर रोड बाजार में अतिक्रमण पर कार्यवाही की थी। उस समय हरीश रावत मुख्यमंत्री थे जो अपने ही विधायक प्रदीप बत्रा को नीचा दिखाने के लिये यह सब कर रहे थे। लेकिन तब ओम प्रकाश सेठी, जो तब रावत के खास बने हुए थे, बीच में आ गए थे। नतीजा घिल्डियाल ने अतिक्रमण से हाथ खींच लिया था। यहाँ की जॉइंट मजिस्ट्रेट रहते हुए सोनिका ने सिविल लाइन में अतिक्रमण पर सख्त तेवर अपनाए थे, लेकिन तब पूर्व विधायक सुरेश जैन बीच में आ गए थे। नतीजा मामला जहाँ का तहां ठहर गया था। हाल ही में हरिद्वार रोड पर भाजपा नेताओं के स्वामित्व वाले एक काम्प्लेक्स की रेलिंग तोड़कर सड़क की चौड़ाई बढ़ाई गई है। लेकिन इसका कारण जन-समस्या का निराकरण तो नहीं लगता। शायद इसका कारण भावी मेयर चुनाव की राजनीति ही है।

अहम बात यह है कि नगर विधायक प्रदीप बत्रा खुद भी वयापारी हैं और यह सोचना ठीक नहीं है कि वे व्यपारियों के साथ-साथ सड़क पर चलने वाले लोगों के हितों पर भी मनन करते होंगे। उनकी पहली स्वाभाविक निष्ठा तो व्यपारियों के प्रति ही दिखती है। ऐसा कई बार सामने भी आया है। ऐसे में यह उम्मीद तो नहीं की जानी चाहिये कि उनके रहते अतिक्रमण पर कोई कार्यवाही होगी। फिर ज़ाहिर है कि ख़राब, टूटी-बिखरी सड़कों पर भी चलने की जगह कैसे मिलेगी? यह भी प्रदीप बत्रा की ही एक उपलब्धि है।

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