उत्तराखंड में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का गहन रंगमंच प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

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परम नागरिक ब्यूरो


देेेहरादून:- देेेहरादून के ओलम्पस हाई स्कूल में सुप्रसिद्ध रंग व्यक्तित्व श्री श्रीश डोभाल के नेतृत्व में उत्तराखंड में ‘नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा’ 40 दिवसीय ‘प्रोडक्शन ओरिएंटेड इंटेंसिव थिएटर वर्कशॉप’ किया गया (8 मार्च से 16 अप्रैल 2019 तक) जिसमें दर्शकों के लिए नाट्य प्रस्तुति ‘गढ़ गाथा – मुगल शहज़ादा’ का उद्घाटन भी किया गया ।

10 से अधिक एक्सपर्ट्स ने थिएटर के विभिन्न पक्षों पर प्रशिक्षण दिया जिसमें अभिनय को प्राथमिकता दी गई और एक नया नाटक किया गया जिसकी प्रस्तुति 14 अप्रैल को गल्जवाड़ी गाँव में की गई और 16 अप्रैल को ओलम्पस हाई स्कूल, देहरादून में की गई । भारत के विभिन्न शहरों में इसके प्रदर्शन किए जाएंगे, जिसमें उपलब्धता के आधार पर डबल कास्ट रखी जाएंगी।

 

कार्यशाला में प्रो. डी. आर. अंकुर (पूर्व निदेशक, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय) ने नाट्यशास्त्र व प्राचीन और आधुनिक रंगमंच, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से डॉ. सुवर्ण रावत(मूवमेंट और बॉडी लैंग्वेज), दक्षिणा शर्मा(रूप सज्जा), विश्वप्रसिद्ध नाट्य निर्देशक(आधुनिक रंगमंच में तकनीक का उपयोग), सुदर्शन जुयाल (NSD & FTII, सिनेमा और रंगमंच का परस्पर योगदान) और श्री बस्वा लिन्गय्या बसु (निदेशक, बंगलूरू केन्द्र, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, लोक रंगमंच) ने अपने अपने विषय पर प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया।

 

इनके अतिरिक्त उत्तराखंड के कुछ प्रतिष्ठित कलाकारों ने भी रंगमंच के विभिन्न पहलुओं पर उत्तराखंड और अन्य राज्यों से आए प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया जिनमें प्रमुख हैं.. उत्तराखंड रत्न श्री नरेंद्र सिंह नेगी, डॉ. मनोज रान्गड़ (एक्टिंग-मेडिटेशन), श्रीमती मनोरमा नेगी (कोरियोग्राफ़ी) श्री हिमांशु बी. जोशी (दिल्ली स्थित लाइट डिज़ाइनर), संजय बडोनी और अनुराग वर्मा ।

एन.एस.डी. के पूर्व निदेशक प्रोफेसर देवेंद्र राज अंकुर ने कहा, उत्तराखंड से सबसे सबसे अधिक एन.एस.डी. स्नातक निकले हैं, किंतु शिरीष डोभाल जैसे 1या 2 रंगकर्मी ही यहां सक्रिय हैं. प्रशिक्षित रंगकर्मियों का अपने राज्यों में समय देना उनका कर्तव्य होना चाहिए, भले ही वह फिल्मों में ही क्यों ना व्यस्त हों प्रोफेसर अंकुर ने यह भी कहा कि हर वर्ष उत्तराखंड के नगरों में नाट्य समारोह आयोजित किए जाने चाहिए, संस्थाओं के द्वारा या सरकारी सहायता से. तभी उत्तराखंड का रंगमंच अपनी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और प्रतिष्ठा बना पाएगा !


एन.एस.डी. के बेंगलुरु सेंटर के निदेशक श्री सी0 बसवालिंगैया बसु ने कहा कि अव्यावसायिक रंगकर्मियों को संगठित होकर कार्य करना चाहिए. रंगमंच में अध्यापकों का योगदान अपेक्षित है और स्कूली शिक्षा से ही रंगमंच अनिवार्य किया जाना चाहिए. शिक्षा विभाग इसमें पहल कर सकता है।
कार्यशाला के समापन पर कमल रावत द्वारा लिखित नाटक गढ़ गाथा-मुगल शहज़ादा का सफल मंचन श्री श्रीश डोभाल के निर्देशन में किया गया। नाटक में मुख्य भूमिकाएं पिथौरागढ़ के माही पापड़ा, लखनऊ के अनूप कुमार सिंह, फ़िल्म अभिनेत्री मलिहा मल्ला, देहरादून के राकेश आर्य, ऋतिका नेगी, अरुण ठाकुर, सागर शर्मा आदि ने निभाई और नेपथ्य में टी के अग्रवाल, नितीश कुलेठा, खुशी शर्मा आदि थे। नाटक में सहायक निर्देशन अनुराग वर्मा और कार्यक्रम का संयोजन कुणाल शमशेर मल्ला का रहा ।

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