जिला पंचायत की राजनीति में भाजपाईयों के नाम शह और मात

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नागरिक ब्यूरो
रुड़की। जिला पंचायत की राजनीति में भाजपाईयों की स्थिति ‘बना के क्यों बिगाड़ा रे, नसीबा, ऊपर वाले।’ वाली हो रही है। जब वे उम्मीद कर रहे थे कि सरकार जिला पंचायत अध्यक्षा श्रीमती सविता चौधरी को पद से बस हटाने ही वाली है तब सरकार ने उनकी उम्मीदों पर ओस की बूंदे टपका दी और 180 डिग्री पर निर्णय लेते हुए श्रीमती सविता चौधरी को लदान ढुलान के ठेके की नीलामी की अनुमति दे दी। इस विषय में शासन के अपर सचिव हरीश चंद्र सेमवाल द्वारा विधिवत आदेश जारी किया जा चुका है।
यह हकीकत है कि जिला पंचायत का मौजूदा बोर्ड अध्यक्षा श्रीमती सविता चौधरी के जी का जंजाल बन गया है। भाजपा सरकार के गठन के बाद ऐसा कोई दिन गया होगा जब उन्होंने चेन की सांस ली हो। लेकिन यह भी हकीकत है कि वे अपने विरोधियों को छकाए रखने में अभी तक कामयाब हैं। जैसा कि सब जानते हैं कि श्रीमती सविता चौधरी 2016 में उस समय निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्षा चुनी गई थी जब राज्य में राष्ट्रपति शायन चल रहा था। 47 सदस्यों वाली जिला पंचायत को बड़ी संस्था माना जाता है। खासतौर पर इसलिए कि इसमें राज्य सरकार का हस्तक्षेप भी बराबर होता रहता है। यही कारण है कि 2017 में जैसे ही राज्य में भाजपा सरकार बनी थी, श्रीमती सविता चौधरी के लिए मुश्किलों का दौर शुरू हो गया था। जिला पंचायत के विपक्ष द्वारा उनके खिलाफ शिकायतों का अंबार राज्य सचिवालय और मंत्रलय में लगा दिया था। उस समय भाजपा के खानपुर विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैम्पियन विपक्ष के अभियान की अगुआई कर रहे थे। जिनका प्रभाव आखिरकार सरकार को मानना पड़ा था और दिसम्बर 2017 में श्रीमती सविता चौधरी के अधिकार सीज करने के साथ साथ जिला पंचायत के संचालन के लिए एक तीन सदस्यीय समिति गठन करने का फैसला सरकार ने लिया था। अपने इस फैसले पर सरकार को अदालत में मुंह की खानी पड़ी थी। श्रीमती सविता चौधरी पांच महीने की कानूनी लड़ाई के बाद अप्रैल 2018 में पूरे अधिकारों के साथ वापिस लौटी थी और समिति के गठन का शासनादेश निरस्त हुआ था। इसके साथ ही विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैम्पियन ने जिला पंचायत की राजनीति से अपना हाथ खींच लिया था। यही कारण है कि कुछ दिन शांति से गुजरे थे। इसी बीच मानकपुर उप चुनाव में भाजपा के टिकट पर सुभाष वर्मा चुनाव जीते थे और उन्होंने नए सिरे से श्रीमती सविता चौधरी के खिलाफ अभियान छेड़ा था। इस अभियान की कुछ प्रतिध्वनियां सुनाई दी थी। श्रीमती सविता चौधरी की अगुआई में निर्माण की जो निविदाएं जारी की गई थी उनकी शिकायतों का संज्ञान लिया था और सितम्बर के महीने में लदान ढुलान के ठेके की नीलामी पर रोक लगा दी थी। सुभाष वर्मा की अगुआई में जिला पंचायत का विपक्षी खेमा अपनी इस उपलब्धि से संतुष्ट था और उम्मीद कर रहा था कि सरकार अगला फैसला श्रीमती सविता चौधरी को पद से हटाने का लेगी ऐसा इसलिए समझा जा रहा था क्योंकि उच्च न्यायालय ने भी श्रीमती सविता चौधरी के खिलाफ आरोपों की जांच पर रोक नहीं लगाई है। बहरहाल, कल राज्य शासन ने जिला पंचायत के मामले में अपने पत्ते खोले और भाजपाईयों के नाम शह और मात दर्ज हुई। जाहिर है कि जिला पंचायत की राजनीति में श्रीमती सविता चौधरी अभी भी अपने विरोधियों को छकाने में सफल हैं।

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